उत्तर-केंचुए में खण्डीभवन (Segmentation in earthworm)— केंचुए का सम्पूर्ण शरीर बाहर की ओर से

STUDY ACTIVITY BY Bhushan Sahu
गोलाकार खाँचों (Circular grooves) में बँटा रहता है जिन्हें वलय या खण्ड (Annuli) कहते हैं। इनकी संख्या 100 से
120 तक होती है। इस प्रकार से वलयों या खण्डों के बनने की क्रिया को चिन्हित विखण्डन (Metameric segmentation)
कहते हैं। अगले सिरे के प्रथम खण्ड को मुख खण्ड (Buccal segment) या पेरिस्टोमियम (Peristomium) कहते हैं
जिसके कारण अग्रभाग पर अर्द्ध चन्द्राकार मुख पाया जाता है। मुख के ऊपर प्रथम खण्ड का ही एक प्रवर्द्ध निकला रहता
है जो प्रोस्टोमियम (Prostomium) कहलाता है। यह मुख को ढंके रहता है। शरीर का अन्तिम खण्ड गुदा खण्ड कहलाता
है जिसके अन्त में गुदा (Anus) स्थित होती है। प्रत्येक दो खण्डों के बीच में अन्तरखण्ड दरार (Inter segmental
groove) स्थित होती है। केंचुए के शरीर की पूरी लम्बाई के मध्य पृष्ठीय (Mid dorsal) सतह पर एक नीली रेखा पायी जाती है जो वास्तव में पृष्ठीय रुधिर वाहिका के कारण होती है।
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